प्रेस डे

तुम एक दर्पण हो, नयन हो, समंदर में खोई, उस नोका के, प्रकाश स्तम्भ हो, लोकतंत्र के रक्षक तुम, तुम चौथे स्तम्भ हो… जन जन की आवाज, तुम निर्बल की पुकार हो, हे पत्रकार..! तुम राष्ट्र के चौकस पहरेदार हो !! ©Mukansu Kumar

शून्य से शिव

गिरता हूं , सम्भलता हूँ, गिरता हूँ , चलता हूँ , दौड़ता हूँ… शून्य हूँ…मै, कुछ इस तरह, शिव तक का, सफऱ तय करता हूँ..!! फिसलता हूँ, गिरता हूं, टूटता हूँ, बिखरता हूं, फिर एक सिरे से, खुद को चुनता हूँ, आइना हूँ…मै कुछ इस तरह, संवरता हूँ !! जलता हूँ, तेज हूँ, अभिमानित हूँ, … More शून्य से शिव

घर वापसी…

मैडम एक बार साहब से मिलवा दीजिये न मुझे उनसे बहुत जरूरी बात करनी है ..प्लीज मैडम (एक लड़की) कहा ना साहब नही मिल सकते तुमसे ..जाओ यहाँ से ..और दूबारा मत आना यहाँ…(राहुल की पत्नी) कौन था ? (राहुल) पता नही कोई लड़की थी.. फ़टे पुराने कपडे पहन रखे थे ..तुमसे मिलने आई थी … More घर वापसी…

वीरान

मै वीरान हूँ,पर ये मत समझना कि,यहाँ कोई आता जाता नही है!! अक्सर, भीड़ संग चलते चलते, अचानक रुक सा जाता हूँ, तब मैं सामने , एक तुम सा शक़्स पाता हूँ, वहाँ,जब टूट कर सताती हो तुम, हर्फ़ों में डूब जाने , चला जाता हूँ,मै कभी कभी खुद को टटोलने वीराने में चला आता … More वीरान

पुरुष प्रधान समाज 2

तुम्हे नही लगता तुम्हारी भूमी बंजर हो गई है…(कृषक की पत्नी) हाँ …मै जानता हूँ…पर तुम क्या चाहती हो ,मै उसे छोड़ दूँ,केवल इस लिये कि वह बंजर है,नही मै उसे छोड़ नही सकता…इस किसान को अपनी भूमी से बहुत प्यार है,फिर वो चाहे बंजर ही क्यों न हो… और तुम बताओ…क्या भूमी मुझे छोड़ … More पुरुष प्रधान समाज 2

पुरुष प्रधान समाज

सुनो, ये लड़की तो वही है न जो कल जीन्स पहन कर स्कूटी चलाती हुई तेजी सी निकल गई थी ,देखो तो माँ बाप ने कैसी छूट दे रखी है …(एक महिला राधा की माँ से ) हा हा देख रही हूँ , आज कल गांव में मटकती फिर रही है , पता नही मर्दो … More पुरुष प्रधान समाज