From the heart

दिल के हिसाब में ,

कुछ मुलाकातें, कुछ यादें और दर्द मिला,

सोचा इन्ही के सहारे जी लेंगें ,

पर ये सब भी जाने कब छीन लिया उसने!!
@mukansu kumar

इतिहास

आज भी लोगो की जहन में जिंदा हूँ कही,

कही कविताओं ,दंतकथाओं में…

बैसाखी सहारे रगड़ रहा हूँ !

जर्जर हो चुका हूं कही में,

कही नर मुझे कुरेद कुरेद कर ,

दफ़्न कर रहे है !

कही मै लोगों के सामने न आ जाऊ,

अगर भूले से सामने आ भी गया तो,

मुझे इस तरह से तोड़ते मरोड़ते है कि,

अगर मुझे आईना दिखा दे कोई ,

तो शायद में ही न पहचान पाऊ खुद को !

ये तो रही बात मेरे लिखे से तत्वों की….

और इमारतों की तो बात ही न पूछो,

कभी कोई वक्त था कि…

रोज़ महफिले सजा करती थी ,

क्या शान ओ शौकत थी मेरी भी उस ज़माने में,

और आज वीरानों सा उझड़ा हूँ …

कभी जो लोग भटकते आ जाते है तो,

गुटखा पान शराब से मेरा मुँह ही भर देते…

प्रेमी युगल मेरी छत पर आ ,

मेरी ही दीवारों को इश्क की किताब समझ,

अपनी इबादत लिख जाते है…

जैसे मेरी कोई फ़िक्र ही नही है उन्हें,

मेरा कोई वजूद ही न हो कोई !

शुक्र है कि कुछ जगहों पर महफूज़ हूँ मै,

कि मैं स्वार्थी नर से मिला नही…

दुआ मांगता हूँ कि ,

कभी मिलु भी नही…!!
@Mukansu kumar

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एक हिंदूस्थान हो जाएं

थोड़ा सा तू मेरा ,खुदा बन जाए !!

कुछ मै तेरा ,भगवान हो जाऊं !!

भुला रंजिशें पुरानी ,

तू थोड़ा सा, हिन्दू बन जाए !!

कुछ मै ,मुसलमा हो जाऊं !!

बहुत लड़ लिए लोगों की बातों मे आ ,

आ अब…

थोड़ा सा तू मेरा ,प्रिय पाक बन जाए !!

कुछ मै तेरा ,चहेता भारत हो जाऊ !!


कर जाए कुछ अब ऐसा कि,

अंग्रजो ने बनाई वो,

दिल में जो दीवार,

उधर से उस दीवार को ,

कुछ तू तोड़ने आए,

कुछ मै तोड़ने आऊँ !!



आओ मिलकर हम दोनों…

फिर से एक , एक हिंदूस्थान हो जाएं!!


@Mukansu kumar

From the heart

​गीता , कुरान तो पढ़ते ही हम ,

मिलकर आओ आज हम ,

अपना हिंदुस्थान पढ़ ले !!

चलो …

बिखरा जो सालों पहले,

आज फिर से मिलकर हम, 

अपना  हिंदुस्थान गढ़ ले !!


@Mukansu kumar

भिखारी

आज मेरी बहिन का होम साइंस का एग्जाम था । मै उसे एग्जाम दिलाने चला। बहिन तो चली गई कॉलेज में, कोई और काम न होने की वजह से मुझे वही खड़े हो कर उसका इंतज़ार करना था, सो वही कॉलेज़ के बाहर बाइक साइड में लगा आप लोगो की पोस्ट पढ़ने लगा । 

बहुत अच्छा लिखा था अजय जी ने , पढ कर मज़ा आया । कुछ और पोस्ट पढ़ ही रहा था कि मेरी नज़र यकायक सामने से आ रहे एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति पर पड़ती है । उसने मैले कुचले कपडे पहन रखे थे पर शरीर से देखने से बिल्कुल हट्टाकट्टा ही लग रहा था ।

जाने क्यूँ लगा कि ये व्यक्ति मेरे पास आ कर जरूर रुकेगा । और वैसा ही हुआ भी।

वो मेरे पास आ कर रुकता हैऔर बोलता है-

– आज कल पइयो (पैसा) कमावणो दोरो (मुश्किल) होगो।

(मै उसे भांप जाता हूं कि इसका उद्देश्य क्या है )

मै- हा पइयो कमावणो दोरो जरूर है पण उने (उसे) कमावणो पड़े। मांगिया कोई कोणी देवे।

– हा देखो कनी उटु (वहा से) फिरतो फिरतो आयो ,कोई रुपयों ही कोणी दे, थाणे (आपके) खन्ने (पास) आयो तो थे(आप) ही नटगा (मना कर दिया)।

म्हारे 14 टाबर है ,हन म्हारे दम घणो चढ़े। उनोरो पेट पालनो पड़े । हन (और) घरू पेट सू है ।कई करू,।

(वो मेरे सामने अपना कटोरा करते हुए बोलता है)

मै उसे देख सोचने लगा …14 बच्चे है और फिर से घरवाली पेट से है और साहब भीख मांग रहे है,

मै-  शर्म नही आती तुम्हे , भीख मांगते हो शरीर से तो हट्टे कट्टे लगते हो ,कोई काम क्यों नही करते । नियति ख़राब हो गई है तुम लोगों की ,आलस से मरे जा रहे हो फ्री में चाहिए सब कुछ तुम्हे। और 14 बच्चे है चलो सभी न कमाते होंगे कुछ तो कमाते होंगे , अरे बैठे बैठे ऐश कर सकते हो ,पर नही तुम लोगो को तो भीख मांगने की आदत ही हो गई है।

वो मेरी तरफ हंस के देखता है और चलता बनता है, मै उसे जाते हुए देखता हूँ ,पर उसकी हंसी …वो हँसी मेरे लिए एक सवाल छोड़ जाती है ,मै उसे काफी देर तक जाते देखता रहा…..

और सोचता रहा कि वो आख़िर मेरा जवाब सुन हँसा क्यूँ, मै सोच ही रहा था और उसे जाते देख रहा था…

पर…

पर…कुछ देर में ही वो अदृश्य हो गया। कहाँ गया, किस तरफ पता ही न चला, जबकि मेरी नज़र उससे हटी तक नही, जाने कौंन था…

उसका उद्देश्य क्या था ???

पता नही…

@Mukansu kumar

जाने कौन था..

तुझे तो समन्दरों सी गहराई में छुपाया था किसी ने,

और डूबा रहा खुद भी, 

एक सीप की तरह,

जाने कौन था,

खोया रहा ,खुद-खुद में ही वहा

तेरी यादों संग छुप छुप कर, 

तुझे आवाज़ देता रहा कोई !!


मिलता रहा तुझसे, तेरी रूह से 

शहर भर घूमता रहा ,

वो मुसाफ़िर मसखरों सा,

जाने कौन देश से आया था…

खुशिया बाटता रहा नक़ाब लिए वहां,

तेरी बेवफाई के किस्से सुना,

वाह वाही लूटता रहा कोई !!



हाल- ए- दिल आहिस्ता से पूछे जो किसी ने,

देखता रहा कई देर उसे…

जाने किस कमसिन के लिए पागल था,

तार न छेड़ो जख्मो के, 

दुखता है, बोल वही

रात भर बाहें फैलाए ,

रोता रहा कोई !!


@Mukansu kumar