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दुश्मन

स्तब्ध था मैं,

देख तुझे ,

तेरी क्रूरता,

तेरे वहशीपन को,

जिसने मुझे रोने,

चिल्लाने नही दिया

ए दुश्मन तूने मानवता की हद को मिटा दिया!!

तूने छिला मुझे

काटा, अंतड़िया निकल ली मेरी

जैसे कोई मरे जानवर पर भी

सितम नही करता

तूने मुझे उससे गिरा बना दिया

ए दुश्मन तूने मानवता की हद को मिटा दिया!!

तूने जां ली मेरी

अफसोस नही,

अफसोस इस बात का है,

कि या तो तूने खुद को,

या मुझे मानवता की हद से हटा दिया

ए दुश्मन तूने मानवता की हद को मिटा दिया !!

©mukansu kumar

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From the heart

कौन हिसाब रखे,

अब टूटती सासों का,

यादों के पुलिंदे,

में उलझी जां,

और ढलती ये

शाम सिंदूरी,

हमसे अब,

रुक न पायेगी!!

©Mukansu kumar

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From the heart

न बस सको गर,

मेरी रूह में रूह मिलाकर,

तुम मदहोश आँखों से अपनी,

इक यादों का,

जाम पिला जाओ,

पहले नशे सी चढ़ो,

फिर आदत,

बुरी बनकर,

बरबाद कर दो हमें !!

न आ सको,

बन कर इश्क गर,

तुम इक,

लाइलाज बीमारी ही,

बन आओ,

कुछ सताओ,

कुछ रुलाओ,

थोड़ा सा हँसाकर,

ले डुबो हमें …!!

©kumar Mukansu

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प्रेस डे

तुम एक दर्पण हो,

नयन हो,

समंदर में खोई,

उस नोका के,

प्रकाश स्तम्भ हो,

लोकतंत्र के रक्षक तुम,

तुम चौथे स्तम्भ हो…

जन जन की आवाज,

तुम निर्बल की पुकार हो,

हे पत्रकार..!

तुम राष्ट्र के चौकस पहरेदार हो !!

©Mukansu Kumar

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शून्य से शिव

गिरता हूं ,

सम्भलता हूँ,

गिरता हूँ ,

चलता हूँ ,

दौड़ता हूँ…

शून्य हूँ…मै,

कुछ इस तरह,

शिव तक का,

सफऱ तय करता हूँ..!!

फिसलता हूँ,

गिरता हूं,

टूटता हूँ,

बिखरता हूं,

फिर एक सिरे से,

खुद को चुनता हूँ,

आइना हूँ…मै

कुछ इस तरह,

संवरता हूँ !!

जलता हूँ,

तेज हूँ,

अभिमानित हूँ,

शिथिल हूँ,

ढलता हूँ,

लड़ता हूँ,

फिर निकलता हूँ,

अरुण हूँ…मै

कुछ इस तरह ,

अरुणोदय करता हूँ !!

कोशिश करता हूँ,

हारता नही कुछ भी,

सीखता हूँ,

सुधार करता हूँ,

जीतता हूँ,

‘अंश ‘ हूँ…मै

कुछ इस तरह ,

सफलता की सीढ़ी चढ़ता हूँ !!

©Mukansu Kumar

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घर वापसी…

मैडम एक बार साहब से मिलवा दीजिये न मुझे उनसे बहुत जरूरी बात करनी है ..प्लीज मैडम (एक लड़की)

कहा ना साहब नही मिल सकते तुमसे ..जाओ यहाँ से ..और दूबारा मत आना यहाँ…(राहुल की पत्नी)

कौन था ? (राहुल)

पता नही कोई लड़की थी.. फ़टे पुराने कपडे पहन रखे थे ..तुमसे मिलने आई थी ..

मैने भगा दिया..(राहुल की पत्नी)

ठीक किया तुमने ..आज कल भिखारियों ने परेशान कर रखा है …

अच्छा मेरा टिफिन रेडी है ..मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है । (राहुल)

जी अभी लाई । (राहुल की पत्नी)

(एक महीने बाद अचानक राहुल को माँ बाबा की याद आती है और वह माँ बाबा से मिलने जोधपुर रवाना हो जाता है)

जाने माँ बाबा कैसे होंगे ,छुटकी कैसी होगी,छुटकी की शादी हो गई होगी शायद , नही हुई तो मै खुद उसके लिए एक लड़का देखूंगा,घर में सब अच्छे होंगे, बाबा ने गिरवी रखा घर छुड़वा लिया होगा , नही तो में आ गया हूं न मै छुड़वाऊंगा घर…मन में अनन्त इच्छाएं और सवाल लिए, राहुल आज कई सालों बाद घर को लौट रहा है,…

दिल्ली से जोधपुर तक का सफ़र आज उसे उन 15 सालों के वक्त से भी लंबा लग रहा है ,जबकि उसने इस दौरान माँ बाबा को एक फोन लगा उनका हालचाल तक भी न पूछा था ।

ये कैसी हलचल थी उसके शरीर में जो उसे …न बैठने दे रही थी …न एक जगह रुकने दे रही थी,वह बार बार खिड़की से बाहर देखता, पास बैठे यात्रियों से स्टेशन के बारे में पूछता की कौनसा स्टेशन है? कितनी दूर है जोधपुर ??

उसकी इस बेसब्री को एक महिला देख रही थी..जो फ़टे पुराने कपड़ो में कोई भिखारिन ही लगती थी, ने कहा… लगता है घर लौट रहे हो ..!

हाँ कई दिनों बाद याद आया की मेरा एक घर भी है । (राहुल जवाब देता है )

बाबु कौन कौन है घर में तुम्हारे ??(भिखारिन)

घर में ,घर में वे सब लोग है जिनसे घर बनता है , मेरे घर में भूमि जैसी माँ है, आसमा जैसा पिता और एक प्यारी सी छोटी बहना है ,जिनसे आज में कई दिनों बाद मिलने जा रहा हूँ, पता है.. मुझे देखेंगे तो फुले नही समायेंगे ..देखना (राहुल)

हा हा जरूर ( भिखारिन इतना कह कर चुप हो गई और अपने ही विचारो गोते लगाते हुए जाने क्या सोच रही थी..और मन ही मन मुस्कुरा भी रही थी )

लेकिन राहुल की बेसब्री उसे चुप नही रख पा रही थी..उसने बात आगे बढ़ाते हुए उसके बारे मे पूछा तो।उसने बताया कि माँ बाबा ने साहूकार से कर्जा लिया था, घर गिरवी रख कर ,बाबा लौटा नही पाए ,घर बिक गया हम सड़क पर आ गए,माँ ने इस दुख की घड़ी में बीमारी के चलते साथ छोड़ दिया, बाबा अपने बेटे के इंतज़ार में पागल से हो गए है, सोचा बेटा पढ़ लिख कर आएगा तो सारा कर्ज उतार देगा, पर वो जब लौट कर नही आया तो मै उसको ढूंढने दिल्ली गई थी , ..पर उसकी पत्नी ने मुझे बाहर से ही भगा दिया ,फिर भी पुरे 27 दिन उसके घर के बाहर इंतजार किया कि कभी तो मिलेगा भईया पर जब उससे बात न हो सकी तो आज उसी बूढ़े बाप पर फिर से बोझ बनने जा रही हूँ कहते कहते जैसे उसकी आँखों में समंदर उमड़ आया , वह आँसुओ को पी जाना चाहती थी पर ,ऐसा कर न सकी।

राहुल की आँखे भी नम थी।

भिखारिन ने कहा की क्या हुआ बाबू ये तो हमारी कहानी है, आपके घर में सब ठीक ही होंगे ,आप निचिन्त हो कर घर जाइये..।

(इतने में स्टेशन आ गया,राहुल उस भिखारिन से कुछ और पूछता इससे पहले ही वह जा चुकी थी )

राहुल घर की तरफ धीरे धीरे बढ़ने लगा , उसे अपनी पत्नी की बात याद आई की कोई लड़की मिलने आई थी फ़टे पुराने कपडे पहनें थे और उसने उसे भगा दिया..।

और मैने भी तो समर्थन किया था …।

तो अब मन में वही सारी बाते घूम रही थी जो उस भिखारिन ने बताई थी ,कही वह मेरे ही घर की बात तो नही बता रही थी… ,

कही माँ बाबा..नही

कही , कही वो छुटकी तो नही थी.. ,

नही नही छुटकी नही हो सकती ,

और अगर हुई तो …

नही नही मै ये क्या सोच रहा हूँ …

(अपने आप से बाते करते आज कई सालों बाद अपने घर के सामने खड़ा था राहुल…पर अंदर जाने की हिम्मत न जुटा पाया…)

वही खड़े खड़े रोने लगा और खुद को कोसने लगा …तभी एक बुजुर्ग महिला आई और उसे गले से लगा लिया, बाबु जी और छुटकी दोनों ही दौड़े चले आ रहे थे उसकी तरफ …वह (राहुल)और जोर से रोने लगा ..।

उसने भिखारिन को शुक्रिया अदा किया जो उसने एक भयानक सच से अवगत कराया और दुआ की कि उसका भाई भी घर की तरफ लौट आए ।

(उसके बाद राहुल कभी माँ बाबूजी और छुटकी को छोड़ कर नही गया , अपनी पत्नी और बच्चों को भी यही बुला लिया और सभी हसीं ख़ुशी रहने लगे)

©Mukansu kumar